शानदार खुशखबरी Bihar सरकार की मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन (MVPY) बढ़कर ₹1100 मासिक Complete Details & Easy Application Process
जानिए बिहार की मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना (MVPY) की ताज़ा घोषणा ₹400 से बढ़ाकर ₹1100 मासिक पेंशन, 1.1 करोड़ प्रधानमंत्री लाभार्थियों तक पहली किस्त, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य सभी अपडेट्स।
बिहार मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना 2025
₹400 से बढ़कर ₹1100 मासिक पेंशन – पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और सभी ताज़ा अपडेट
परिचय
बिहार सरकार ने वर्ष 2025 में राज्य के बुजुर्ग नागरिकों के लिए एक ऐसा फैसला लिया है, जिसे सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के अंतर्गत अब बुजुर्गों को मिलने वाली मासिक पेंशन को ₹400 से बढ़ाकर ₹1,100 कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी केवल एक आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह सरकार की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें वृद्धावस्था को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़कर देखा गया है।
इस फैसले की घोषणा जून 2025 में की गई थी और इसे जुलाई 2025 से लागू कर दिया गया। इसके बाद हर महीने की 10 तारीख को लाभार्थियों के बैंक खातों में पेंशन की राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के माध्यम से भेजी जा रही है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि बुजुर्गों को समय पर सहायता भी मिल रही है।
बढ़ी हुई पेंशन की पहली किस्त 12 जुलाई 2025 को भेजी गई, जिसे राज्य सरकार ने “पेंशन उत्सव” के रूप में मनाया। इस अवसर पर लगभग 1.11 करोड़ बुजुर्ग लाभार्थियों के खातों में राशि ट्रांसफर की गई। सरकार के अनुसार, इस दिन करीब ₹1,227 करोड़ की राशि छह सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत वितरित की गई।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस अवसर पर कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग नागरिक सम्मान के साथ जीवन जी सकें और उन्हें बुनियादी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर न रहना पड़े।
मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना का उद्देश्य
मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना बिहार सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के उन नागरिकों को वित्तीय सहायता देना है, जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है और जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं।
वृद्धावस्था में आमतौर पर आय के स्रोत सीमित हो जाते हैं। ऐसे में दवा, इलाज, भोजन और रोजमर्रा के खर्चों के लिए बुजुर्गों को परिवार या समाज पर निर्भर रहना पड़ता है। यह योजना इस निर्भरता को कम करने और बुजुर्गों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
इस योजना के माध्यम से सरकार यह संदेश भी देती है कि समाज के निर्माण में अपना पूरा जीवन लगाने वाले बुजुर्ग नागरिक सम्मान और सुरक्षा के हकदार हैं।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का व्यापक दायरा
मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना बिहार की उस व्यापक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है।
इस व्यवस्था में शामिल प्रमुख योजनाएं हैं:
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना
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मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना
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इंदिरा गांधी विधवा पेंशन योजना
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दिव्यांग पेंशन योजना
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लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना
इन सभी योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक वर्गों को सहारा देना है, ताकि कोई भी नागरिक आर्थिक तंगी के कारण सम्मानजनक जीवन से वंचित न रह जाए।
पेंशन राशि में बदलाव: पहले और अब
इस योजना के तहत पहले पेंशन राशि आयु के आधार पर अलग-अलग दी जाती थी। 60 से 79 वर्ष के लाभार्थियों को ₹400 प्रति माह और 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को ₹500 प्रति माह पेंशन मिलती थी।
जुलाई 2025 से इस व्यवस्था को बदल दिया गया है। अब आयु के आधार पर कोई अंतर नहीं किया गया है और सभी पात्र लाभार्थियों को समान रूप से ₹1,100 प्रति माह पेंशन दी जा रही है।
इस बदलाव से बुजुर्गों को हर महीने ₹700 की अतिरिक्त सहायता मिल रही है। यह राशि छोटी लग सकती है, लेकिन ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह एक बड़ी राहत साबित हो रही है।
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पेंशन बढ़ाने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?
पिछले कुछ वर्षों में महंगाई लगातार बढ़ी है। दवाइयों, इलाज, भोजन और दैनिक जरूरतों की लागत में भी काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में पहले मिलने वाली पेंशन राशि बुजुर्गों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं रह गई थी।
सरकार ने इस स्थिति को समझते हुए पेंशन राशि में बढ़ोतरी का फैसला लिया। यह निर्णय केवल आंकड़ों पर आधारित नहीं था, बल्कि इसमें समाज की वास्तविक जरूरतों और बुजुर्गों की रोजमर्रा की परेशानियों को ध्यान में रखा गया।
भुगतान की नई व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत पेंशन राशि हर महीने की 10 तारीख को सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। इसके लिए DBT प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
इस प्रणाली के फायदे यह हैं कि:
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बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है
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भुगतान में देरी की समस्या कम होती है
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पारदर्शिता बनी रहती है
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लाभार्थी को पूरी राशि सीधे मिलती है
लाभार्थियों की संख्या और सरकार पर वित्तीय असर
राज्य सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या 1.09 करोड़ से अधिक है। पहली बढ़ी हुई किस्त लगभग 1.11 करोड़ लोगों को भेजी गई।
इस फैसले से सरकार पर सालाना करीब ₹3,594 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। इसके बाद राज्य का कुल वार्षिक पेंशन खर्च लगभग ₹9,000 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पहले करीब ₹5,400 करोड़ था।
हालांकि, सरकार इसे खर्च नहीं बल्कि सामाजिक निवेश मानती है, क्योंकि इससे समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सीधा लाभ मिल रहा है।
पात्रता: कौन इस योजना का लाभ ले सकता है?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं।
आवेदक की आयु कम से कम 60 वर्ष होनी चाहिए।
आवेदक बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
आवेदक गरीबी रेखा से नीचे यानी BPL श्रेणी में आता हो।
यदि कोई व्यक्ति पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य पेंशन योजना का लाभ ले रहा है, तो वह इस योजना के लिए पात्र नहीं होगा।
पेंशन की राशि कौन और कितनी पा रहा है?
वर्तमान में सभी पात्र लाभार्थियों को ₹1,100 प्रति माह पेंशन मिल रही है। इसमें आयु या वर्ग के आधार पर कोई अंतर नहीं है।
पहले जहां 60 से 79 वर्ष के बुजुर्गों को कम राशि मिलती थी, अब उन्हें भी समान रूप से बढ़ी हुई पेंशन मिल रही है। इससे सामाजिक समानता और न्याय की भावना मजबूत हुई है।
आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन तरीका
जो लोग ऑनलाइन आवेदन करना चाहते हैं, वे SSPMIS पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
सबसे पहले पोर्टल पर जाकर पंजीकरण करना होता है। इसके बाद वोटर ID और आधार नंबर के माध्यम से पहचान सत्यापन किया जाता है। OTP के जरिए आधार सत्यापन पूरा होने के बाद व्यक्तिगत जानकारी, बैंक विवरण और जरूरी दस्तावेज अपलोड किए जाते हैं। फॉर्म जमा करने के बाद आवेदन की रसीद डाउनलोड की जा सकती है।
आवेदन प्रक्रिया: ऑफलाइन तरीका
जिन बुजुर्गों को ऑनलाइन आवेदन में कठिनाई होती है, उनके लिए ऑफलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है।
इसके लिए नजदीकी पंचायत कार्यालय, CSC या ब्लॉक कार्यालय से आवेदन फॉर्म लिया जा सकता है। फॉर्म भरकर आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने के बाद उसे संबंधित कार्यालय में जमा किया जाता है।
Apply Online on sspmis.bihar.gov.in
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज
आधार कार्ड
वोटर ID
जन्म प्रमाण पत्र या आयु प्रमाण
निवास प्रमाण पत्र
बैंक पासबुक
पासपोर्ट साइज फोटो
शपथ पत्र, यदि अन्य कोई पेंशन प्राप्त नहीं हो रही हो
आवेदन की स्थिति कैसे जांचें?
आवेदन करने के बाद लाभार्थी SSPMIS वेबसाइट पर जाकर अपनी स्थिति जांच सकते हैं। इसके लिए Beneficiary ID, आधार नंबर या बैंक विवरण का उपयोग किया जा सकता है।
लाभार्थियों की प्रतिक्रिया
कई लाभार्थियों ने पेंशन बढ़ने पर संतोष और खुशी जताई है। एक लाभार्थी सुनीता देवी का कहना है कि बढ़ी हुई पेंशन से अब दवाइयों और इलाज का खर्च निकालना आसान हो गया है। पहले उन्हें बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें आत्मनिर्भर महसूस होता है।
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इस योजना से समाज पर क्या असर पड़ेगा?
इस योजना से बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
स्वास्थ्य और पोषण पर खर्च बढ़ेगा।
परिवार पर आर्थिक बोझ कम होगा।
बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा का अहसास मिलेगा।
समाज में सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना में की गई यह बढ़ोतरी बिहार सरकार की एक संवेदनशील, दूरदर्शी और जनकल्याणकारी पहल है। ₹1,100 की मासिक पेंशन बुजुर्गों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं देती, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता भी प्रदान करती है।
यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इस योजना के पात्र हैं, तो समय रहते आवेदन करना बेहद जरूरी है। यह योजना न केवल आज की जरूरतों को पूरा करती है, बल्कि आने वाले समय में बुजुर्गों के जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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